[1]
उज्जवल कुमार and अखिलेश कुमार विश्वकर्मा, “योगवसिष्ठ महारामायण में मन का स्वरुप”, IJISEM, vol. 5, no. 1, pp. 248–253, Mar. 2026, doi: 10.69968/ijisem.2026v5i1248-253.