1857 का विद्रोह: कारण, स्वरूप और भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में इसकी भूमिका का समालोचनात्मक अध्ययन

Authors

  • अनुपम मित्र सहायक आचार्य, इतिहास विभाग,राजकीय महाविद्यालय,स्वार,रामपुर(उ.प्र.).

DOI:

https://doi.org/10.69968/ijisem.2023v2i138-41

Keywords:

1857 का विद्रोह, औपनिवेशिक शासन, राजनीतिक असंतोष, सामाजिक परिवर्तन, राष्ट्रवाद

Abstract

1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण और बहुआयामी घटना थी, जिसने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध व्यापक असंतोष को संगठित रूप में अभिव्यक्त किया। यह अध्ययन विद्रोह के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों का समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है तथा इसके स्वरूप और प्रभावों को स्पष्ट करता है। विद्रोह में सैनिकों, किसानों, जमींदारों और पारंपरिक शासकों की सहभागिता ने इसे एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया, यद्यपि इसमें समन्वित नेतृत्व का अभाव था। अध्ययन यह दर्शाता है कि यह विद्रोह पूर्णतः राष्ट्रवादी नहीं था, फिर भी इसने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध की नींव रखी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय समाज में राजनीतिक चेतना का विकास हुआ, जिसने आगे चलकर राष्ट्रवादी आंदोलन को गति प्रदान की।

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Published

13-03-2023

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[1]
अनुपम मित्र 2023. 1857 का विद्रोह: कारण, स्वरूप और भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में इसकी भूमिका का समालोचनात्मक अध्ययन. International Journal of Innovations in Science, Engineering And Management. 2, 1 (Mar. 2023), 38–21. DOI:https://doi.org/10.69968/ijisem.2023v2i138-41.