मध्य प्रदेश में लैंगिक समानता के परिप्रेक्ष्य में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रभाव का समाजशास्त्री अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.69968/ijisem.2026v5i247-60Keywords:
लैंगिक समानता, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बालिका शिक्षा, सामाजिक परिवर्तन, जागरूकता अभियानAbstract
भारतीय समाज में लैंगिक असमानता एक दीर्घकालिक सामाजिक समस्या रही है, जिसमें विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं अधिकारों के प्रति भेदभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। इस संदर्भ में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (BBBP) अभियान एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के रूप में उभरा है, जिसका उद्देश्य बालिका भ्रूण हत्या को रोकना, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना तथा समाज में सकारात्मक लैंगिक दृष्टिकोण विकसित करना है। प्रस्तुत अध्ययन मध्य प्रदेश के भोपाल (शहरी) और रायसेन (अर्ध-ग्रामीण) जिलों में इस अभियान के प्रभाव का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह शोध परिमाणात्मक, विवरणात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति का है, जिसमें 500 उत्तरदाताओं से स्तरीकृत यादृच्छिक नमूनाकरण के माध्यम से आंकड़े एकत्र किए गए। 5-बिंदु लिकर्ट स्केल आधारित संरचित प्रश्नावली का उपयोग करते हुए जागरूकता, सामाजिक दृष्टिकोण, तथा व्यवहारिक परिवर्तनों का आकलन किया गया। अध्ययन के परिणाम दर्शाते हैं कि अभियान के प्रति व्यापक जागरूकता विकसित हुई है तथा 80 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने इसे बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में प्रभावी माना। मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों एवं सरकारी कार्यक्रमों की भूमिका इस संदर्भ में महत्वपूर्ण रही। सामाजिक सोच में सकारात्मक परिवर्तन, जैसे बाल विवाह में कमी, बेटियों के प्रति सम्मान में वृद्धि और शिक्षा के प्रति बढ़ती रुचि, स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुए हैं। हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक मान्यताओं, आर्थिक सीमाओं और संसाधनों की कमी के कारण यह परिवर्तन अभी पूर्णतः व्यवहारिक स्तर पर स्थापित नहीं हो पाया है। अतः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि BBBP अभियान ने सामाजिक चेतना को सुदृढ़ आधार प्रदान किया है, परंतु इसके स्थायी प्रभाव हेतु निरंतर क्रियान्वयन, स्थानीय अनुकूलन और व्यापक जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।.
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