योगवसिष्ठ में कर्मयोग और ज्ञानयोग का परस्पर संबंध : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • उज्जवल कुमार पीएच.डी.शोधार्थी, लकुलिश योग विश्वविद्यालय,ujjwalkumar5343@gmali.com
  • अखिलेश कुमार विश्वकर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर, लकुलिश योग विश्वविद्यालय

DOI:

https://doi.org/10.69968/ijisem.2025v4i3408-412

Keywords:

योगवसिष्ठ, कर्मयोग, ज्ञानयोग, अद्वैत, मोक्ष, परस्पर संबंध

Abstract

इस शोध पत्र के द्वारा योगवसिष्ठ में कर्मयोग एवं ज्ञान के परस्पर संबंध का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। आज के समय में साधक कर्म योग एवं ज्ञान योग को अलग-अलग मानते है, परन्तु योगवसिष्ठ के अनुसार कर्म योग एवं ज्ञान योग को आत्मज्ञान एवं मोक्ष प्राप्ति का एक पूरक साधन है। इस शोध पत्र के यह स्पष्ट किया गया है, कि कर्म योग में निष्काम कर्म के द्वारा चित शुद्ध करता है जो ज्ञान योग के साधन के लिय आवश्यक है। वहीं ज्ञान योग द्वारा विवेक-वैराग्य के माध्यम से साधक के समक्ष सत्य ज्ञान प्रदर्शित कर वासना रहित  कर्म अर्थात निष्काम कर्म के लिय प्रेरित करती है। जो आत्म ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के अति अतिमहत्वपूर्ण है।

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Published

31-03-2025

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How to Cite

[1]
उज्जवल कुमार and अखिलेश कुमार विश्वकर्मा 2025. योगवसिष्ठ में कर्मयोग और ज्ञानयोग का परस्पर संबंध : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Journal of Innovations in Science, Engineering And Management. 4, 1 (Mar. 2025), 408–412. DOI:https://doi.org/10.69968/ijisem.2025v4i3408-412.