ग्रामीण विकास में महिला सरपंचों के नेतृत्व एवं योगदान का समाजशास्त्रीय अध्ययन: अशोकनगर जनपद पंचायत, मध्य प्रदेश के विशेष संदर्भ में”
DOI:
https://doi.org/10.69968/ijisem.2026v5i3287-291Keywords:
पंचायती राज व्यवस्था, महिला प्रतिनिधित्व, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय स्वशासन ग्रामीण नेतृत्व, निर्णय-निर्माण, राजनीतिक सहभागिता, ग्रामीण विकासAbstract
भारत में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के लागू होने के पश्चात पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की सहभागिता को संवैधानिक आधार प्राप्त हुआ, जिससे ग्रामीण स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को नई दिशा मिली। प्रस्तुत अध्ययन में मध्य प्रदेश के अशोकनगर तहसील के जनपद पंचायत अशोकनगर के संदर्भ में पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की भूमिका, उत्तरदायित्व, निर्णय-निर्माण की क्षमता, नेतृत्व शैली तथा ग्रामीण विकास में उनके योगदान का समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया गया है।
इस अध्ययन में महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कारकों का परीक्षण किया गया है। साथ ही यह भी विश्लेषण किया गया है कि आरक्षण व्यवस्था ने महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मविश्वास, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा स्थानीय शासन में उनकी प्रभावशीलता को किस सीमा तक बढ़ाया है। अध्ययन में महिला प्रतिनिधियों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का भी विवेचन किया गया है।
प्रस्तुत शोध में प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के तथ्यों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक तथ्यों के संकलन हेतु संरचित साक्षात्कार अनुसूची तथा प्रत्यक्ष अवलोकन का उपयोग किया गया है, जबकि द्वितीयक तथ्यों के लिए पुस्तकों, शोध-पत्रों, सरकारी प्रतिवेदनों तथा अन्य प्रासंगिक स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं में महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक भूमिका, नेतृत्व क्षमता, निर्णयात्मक सहभागिता तथा ग्रामीण विकास में उनके योगदान का मूल्यांकन किया गया है।
References
[1] बुच, एन. (2000). From Oppression to Assertion: A Study of Panchayats and Women in Madhya Pradesh, Rajasthan and Uttar Pradesh. Centre for Women's Development Studies.
[2] दत्ता, पी. (2009). Panchayats and Rural Development. New Delhi: Concept Publishing Company.
[3] देसाई, वी. (2018). ग्रामीण विकास (4th ed.). हिमालय पब्लिशिंग हाउस।
[4] भारत सरकार. (1992). भारतीय संविधान (73वाँ संविधान संशोधन) अधिनियम, 1992. विधि एवं न्याय मंत्रालय।
[5] भारत सरकार. (2024). वार्षिक प्रतिवेदन. पंचायती राज मंत्रालय।
[6] मध्य प्रदेश शासन. (2024). पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग : वार्षिक प्रतिवेदन. भोपाल।
[7] Mathew, G. (Ed.). (2003). Status of Panchayati Raj in the States and Union Territories of India. Institute of Social Sciences.
[8] Narayan, I. (2005). Empowerment through Panchayati Raj. Rawat Publications.
[9] Singh, K. (2009). Rural Development: Principles, Policies and Management. Sage Publications.
[10] World Bank. (2023). Local Governance and Rural Development. Washington, DC.
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 गंगीता शर्मा, सुनीता बाणकर

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License.
Re-users must give appropriate credit, provide a link to the license, and indicate if changes were made. You may do so in any reasonable manner, but not in any way that suggests the licensor endorses you or your use. This license allows for redistribution, commercial and non-commercial, as long as the original work is properly credited.





