खिलाफत और असहयोग आंदोलन: धार्मिक-राजनीतिक एकता और जन-आंदोलन के उदय का समालोचनात्मक अध्ययन

Authors

  • अनुपम मित्र सहायक आचार्य, इतिहास विभाग,राजकीय महाविद्यालय,स्वार,रामपुर(उ.प्र.).

DOI:

https://doi.org/10.69968/ijisem.2023v2i263-67

Keywords:

खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन, राष्ट्रवाद, जनसहभागिता, धार्मिक-राजनीतिक एकता

Abstract

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ने एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का अनुभव किया, जिसमें उसकी प्रकृति अभिजात्य सीमाओं से निकलकर जनआधारित स्वरूप में परिवर्तित हुई। इस परिवर्तन में खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन की संयुक्त भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। प्रस्तुत अध्ययन इन दोनों आंदोलनों के ऐतिहासिक संदर्भ, वैचारिक आधार तथा उनके पारस्परिक संबंधों का समालोचनात्मक विश्लेषण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि धार्मिक और राजनीतिक तत्वों के समन्वय ने भारतीय राष्ट्रवाद को नई दिशा प्रदान की तथा व्यापक जनसहभागिता को सुनिश्चित किया। साथ ही, यह भी पाया गया कि यद्यपि इन आंदोलनों ने हिंदू-मुस्लिम एकता को सुदृढ़ किया, तथापि उनके अंतर्विरोधों ने दीर्घकालिक चुनौतियाँ भी उत्पन्न कीं। इस प्रकार, ये आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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Published

23-06-2023

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[1]
अनुपम मित्र 2023. खिलाफत और असहयोग आंदोलन: धार्मिक-राजनीतिक एकता और जन-आंदोलन के उदय का समालोचनात्मक अध्ययन. International Journal of Innovations in Science, Engineering And Management. 2, 2 (Jun. 2023), 63–67. DOI:https://doi.org/10.69968/ijisem.2023v2i263-67.