योगवसिष्ठ महारामायण में मन का स्वरुप
DOI:
https://doi.org/10.69968/ijisem.2026v5i1248-253Keywords:
योगवसिष्ठ, मन, चित, मनोनिग्रह, जीवनमुक्तिAbstract
प्रस्तुत शोध पत्र मुख्य रूप से योगवसिष्ठ में वर्णित मन का दार्शिनक एवं विश्लेष्णात्मक अध्ययन किया गया है। जिसमे मुख्य रूप से मन का अर्थ, स्थान, कार्य, जीवन्मुक्ति एवं मन का सम्बंध एवं निग्रह के उपाय आदि का वर्णन किया गया है। जिसमे विवेक, वैराग्य, वासनाक्षय, मुक्ति के चार द्वारपाल एवं आत्म विचार को मन की शुधि का प्रमुख साधन माना गया है। इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि मन ही दुःख-सुख, बंधन-मोक्ष आदि का मुख्य कारण है। आज के समय में लोग मानसिक अशांति एवं अनियमित सोच से दुखी लोग के लिय योगवसिष्ठ में वर्णित मन की शिक्षा मनुष्य के लिय बहुत लाभ करी सिद्ध होती है।
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